दादी नानी की कहानियां: मां-बच्चों को इंसाफ दिलाती है 'कौआ-हकनी' की कहानी, लों को छू जाएगी, ... X Permalink ? https://bas4groupnew.blogspot.com/2023/12/blog-post.html संबंधित खबरें चंबल रिवर फ्रंट के राजपूताना घाट पर निकला यह खतरनाक जीव, पर्यटकों में बना डर का माहौल एजुकेशन सिटी में बढ़ा सर्दी का असर, मौसमी बीमारियों से बचने के लिए लगाए रूम हीटर एसटीआर में गश्त की तैयारी,कर्नाटक से आएंगे तीन हाथी, जंगल की सुरक्ष,जानें वजह कभी अंग्रेज सैनिक के मनोरंजन के लिए इस सिनेमा हॉल में दिखाई जाती थी फिल्में बलिया: कुछ सालों पहले बच्चों को सुलाने के लिए दादी, नानी या मां कहानियां सुनाया करती थीं. लेकिन अब इन सब का चलन नहीं रहा. परिवारों के सिमटने के साथ-साथ, ये कहानियां जैसे कहीं गुम हो गईं. बचपन की वो खूबसूरत यादें जब याद आती हैं तो कहीं न कहीं दिलों को झकझोर जाती है. दादी, नानी या मां के द्वारा सुनाई जाने वाली प्राचीन कहानियां आज केवल यादगार बनकर ही तो रह गई हैं. राजा, महाराजा, नवाबों या अन्य तथ्यों पर आधारित वो कहानियां कहीं न कहीं किसी सच्चे माध्यम की तरफ इशारा करती थी. ब...
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